आरज़ू..!!!


 आरज़ू .......
एक आरज़ू है इस दिल में,
के बस जा तू इस दिल में,
के बह जाऊ तुझमें
और खो जाऊ तुझमें..... !!!


बैरागी था मैं याहा,
न कोई मतलब था किसी से
बढ़ते जा रहा न जाने क्यू ,
न कोई वास्ता था किसी से....!!!

इस बेरंग सी खिज़ा में,
एक बहार सी आ गयी,
ऐ रंगरेज़ तूने किस रंग से,
मेरे इस दिल की दीवारें रागवाई  ........!!!!

अरमान है जागे अब
के छोड़  दूँ ये बैराग
बस अब इज़हार-ए - दिल है
और ये आरज़ू बेबाक़ ....!!!!

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