भूली तो बातें जाती है,
वो कैसे भूले तो याद बन जाए..!!!
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ज़ंजीर है तो ज़ंजीर ही सही,
तेरे हाथ जो बंधी, तक़दीर ही सही...!!!
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हम तो चाह रहे थे के वो आये,
कमभख़्त ने याद भेज दी...!!!
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अब मुस्कराहट नहीं, खुद याद आते है,
कहा से खोये है, कहा जाते है...!!
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मैं सोचु के तुम यु आओ पास मेरे,
अब सोचु के दिल में या ज़िन्दगी में..!!!
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तुम से छुप कर कहा जाऊ,
बस याद करलो और हिचकीं से पकड़ लो...!!
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क्यों न कुछ खेल खेले,
तुम छुप जाओ और मैं तुम्हे पा लूँ
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तुम मेरे थे, जब शाम की चाय अच्छी लगती थी,
अब शाम कॉफ़ी सी कड़वी लगती है..!!!
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वो तुम्हारा मुस्कुराना अधूरा था,
जब तेरे रुख़ पैर वो नाथ न हो..!!!
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तेरे शहर में मंज़ूर था मेरा आना,
मेरा भी शहर वह बस्ता था....!!!
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बेचैन जो जाता हूँ कभी,
ये रात बीत न जाये कभी,
सुबह तो तुम यूं चले जाओगे,
रात फिर करेगी इंतज़ार, के अब यादों में आओगे..!!
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अब ये हिम्मत नहीं है कि,
टटोले अपने माँ को,
तुम केहदो सही... वो सही...!!!
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ग़ज़ल लिखनी थी उनकी अदाओं पैर,
बस ख़तम करने के लिए शेर न मिला..!!!
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आओ बैठे कभी महफ़िल में,
एक जाम तुम पियो, एक हम बनाये,
किस्सों का क्या है, बोतल फिर भरली जाए..!!!
कमाई की है, हादसों का है मेहनताना,
क्या दिनु इनको, क्या है बचाना...!!!
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